Sunday, 17 August 2014

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धर्माभिमानियोंद्वारा प्रविष्ट निषेधको आस्थापनद्वारा कूडादानी ऐसा किया गया है, हिन्दुओंके देवी-देवताओंका अपमान !

पुणे - अमेरिकामें फ्लोरिडा स्थित ‘ओम शांति क्लोथिंग’ वस्त्र बनानेवाले आस्थापनद्वारा महिला, पुरुष एवं छोटे बच्चोंके लिए बनाए गए वस्त्रोंके माध्यमसे भगवान श्री गणेश, शिव, लक्ष्मी आदि देवी-देवता एवं शुभचिन्होंका अनादर किया गया है । ( क्या इस प्रकारसे कभी येशू अथवा प्रेषितोंका अनादर किया जाता है ? यदि वैसा किया गया, तो उसका किस प्रकारका दुष्परिणाम इस आस्थापनको भुगतना पडेगा, क्या इसका उन्हें अनुमान है ? हिन्दुओ, आपके असंगठित होनेके कारण ही आज कोई भी उठकर आपके श्रद्वास्थानोंका अनादर करता है । प्रसिदि्धमाध्यमोंद्वारा हिन्दुओंके आस्थास्थानोंके अनादरपर ध्यान नहीं दिया जाता । इसलिए यदि ऐसी घटनाओंको स्थायी रूपसे रोकना है, तो ‘हिन्दू राष्ट्र’ स्थापित करना अनिवार्य है ।- संपादक, दैनिक सनातन प्रभात ) हिन्दू धर्माभिमानियोंद्वारा इस विषयमें किए निषेधको भी कथित आस्थापनद्वारा कोई महत्व नहीं दिया गया है । हिन्दू जनजागृति समितिने भी निषेधपत्र भेजा है, जिसे अभीतक प्रतिसाद नहीं मिला है । (हिन्दुओ, आपकी धर्मभावनाओंका क्या मूल्य है, देखें एवं अब तो हिन्दू संगठन होने हेतु सकि्रय हों ! – संपादक, दैनिक सनातन प्रभात ) महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस आस्थापनने केवल कुछ वस्त्रोंके माध्यमसे नहीं, अपितु लगभग सभी वस्त्रोंके माध्यमसे हिन्दू संस्कृतिके प्रतिकोंका अपमान किया है 

अपमानास्पद क्या है...

१. महिलाओंके लेगिंग्जपर (तंग पाजामा) पोटरीके स्थानपर आनेवाले हिस्सेपर भगवान श्री गणेश, श्री शिव तथा श्री लक्ष्मीके छायाचित्र रंगाए गए हैं । ‘ओम् शांति पावर पैंट्स’के नामसे इन पाजामोंंका विक्रय हो रहा है ।
२. टी शर्टस्पर सामनेकी ओर ओम तथा नमस्ते आदि शब्द लिखे हैं । कुछ स्थानपर योगऋषि साधना कर रहे हैं एवं देवी-देवताके छायचित्र छापे गए हैं ।
आस्थापनका अज्ञान अथवा हिन्दूद्वेषको दिया गया बढावा इस आस्थापनके संकेतस्थलपर कहा गया है कि परिधान किए गए वस्त्रोंके माध्यमसे अंतिम सत्य उजाकर करना हमारा ध्येय है । नमस्ते, शांित, स्वतंत्रता तथा संतुलनसमान सामथ्र्यशील शब्द जनतातक पहुंचाना ही आस्थापनकी प्रेरणा है । (वस्त्रोंपर साति्त्वक शब्द लिखकर साति्त्वकताका प्रसार नहीं होता, अपितु उसके लिए  साति्त्वक वस्त्रोंकी आवश्यकता होती है । एक ओर वस्त्रोंपर हिंदुओंके देवी-देवताओंके छायाचित्र रंगाकर उनका अपमान किस प्रकार होगा, इसका ध्यान रखना तथा दूसरी ओर यह अंतिम सत्यके प्रसारके लिए कर रहे हैं, ऐसा बताना दुरंगापन नहीं है तो और क्या है ? आस्थापनद्वारा बिना किसी कारणके फंसानेवाली एवं अयोग्य भूमिका प्रस्तुत कर उसका हिन्दू द्वेष सौम्य करनेका प्रयास किया जा रहा है ।

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