एक स्थानीय कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के एक अधिकारी को रेप के आरोप से बरी कर दिया है. दो महीने पहले नाबालिग नौकरानी ने अधिकारी पर रेप का आरोप लगाया था. पुलिस ने 11 अगस्त को मामले की क्लोजर रिपोर्ट सौंपी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.
अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव ने कॉमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट में एडिशनल कमिश्नर धुरेंद्र चतुर्वेदी को आरोपों से बरी कर दिया.
रेप का आरोप लगाने वाली महिला 28 जून को अपनी बात से पलट गई. उसने कोर्ट के सामने माना कि आरोपी ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया और उसे पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं है. इससे पहले उसने अधिकारी पर रेप का आरोप लगाया था. 25 जून को दर्ज की गई एफआईआर में अधिकारी पर धारा 376 यानी रेप के तहत आरोप लगाए गए थे.
59 साल के धुरेंद्र का पिछले साल मेरठ से मथुरा तबादला किया गया था. वह आगरा-मथुरा हाइवे पर किराए के एक घर में रहते थे. इससे पहले 16 वर्षीय नौकरानी ने आरोप लगाया था कि 25 जून को जब वह अपनी सैलरी लेने उनके घर पहुंची थी, तो अधिकारी ने उसे कमरे में बुलाकर छेड़छाड़ की कोशिश की और उसका मोबाइल फोन फेंक दिया. लेकिन पुलिस की जांच में नौकरानी के ये आरोप गलत साबित हुए.
अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव ने कॉमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट में एडिशनल कमिश्नर धुरेंद्र चतुर्वेदी को आरोपों से बरी कर दिया.
रेप का आरोप लगाने वाली महिला 28 जून को अपनी बात से पलट गई. उसने कोर्ट के सामने माना कि आरोपी ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया और उसे पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं है. इससे पहले उसने अधिकारी पर रेप का आरोप लगाया था. 25 जून को दर्ज की गई एफआईआर में अधिकारी पर धारा 376 यानी रेप के तहत आरोप लगाए गए थे.
59 साल के धुरेंद्र का पिछले साल मेरठ से मथुरा तबादला किया गया था. वह आगरा-मथुरा हाइवे पर किराए के एक घर में रहते थे. इससे पहले 16 वर्षीय नौकरानी ने आरोप लगाया था कि 25 जून को जब वह अपनी सैलरी लेने उनके घर पहुंची थी, तो अधिकारी ने उसे कमरे में बुलाकर छेड़छाड़ की कोशिश की और उसका मोबाइल फोन फेंक दिया. लेकिन पुलिस की जांच में नौकरानी के ये आरोप गलत साबित हुए.

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